भारत का पुनरूत्थान
भारत के उत्थान का अर्थ है , हमारे सनातन धर्म का उत्थान | भारत की महानता का अर्थ है , हमारे सनातन धर्म की महानता | परमेश्वर ने इस विश्व मे धर्म संस्थापन के लिए ही भारतवर्ष की योजना की है | हमारा धर्म चिरकालिक धर्म है | वह विश्व के सभी देशों को, सभी कालों मे उपकारक है | दुनिया मे यही एक धर्म है जो अपने उपासकों को भगवान के निकट ले जाता है , और उससे प्रत्यक्ष भेंट कराता है |सत्य का वास्तविक आग्रह यही धर्म करता है | सत्य का वास्तविक मार्ग यही धर्म दिखाता है | हमारा धर्म कहता है कि भगवान केवल मानवों मे ही नहीं वे पशु -पक्षियों मे , कृमि -कीटकों मे ,घट-घट मे और कण-कण मे विद्यमान है | करने , कराने वाला सब भगवान हैं | ऐसी महान श्रद्धा केवल हमारा धर्म ही प्रस्थापित करता है | हमारा धर्म जीवन के प्रत्येक अंग का अंतर्वाह्य निर्धारण करता है |हमारा धर्म हमें मृत्यु के पार ले जाता है और अमरता से साक्षात कराता है | दुनिया मे इस ढंग का यही एक धर्म है |
राष्ट्रीयता का मतलब केवल राजनीति से नहीं है | राष्ट्रीयता का मतलब है हमारा धर्म | राष्ट्रीयता ही हमारा उपासना पंथ है | राष्ट्रीयता ही हमारी श्रद्धा है | यही बात दूसरे शब्दों मे इस प्रकार कही जा सकती है | ' हमारा सनातन धर्म ही हमारी राष्ट्रयता है ' | इस हिन्दू राष्ट्र का जन्म सनातन धर्म के साथ हुआ है | सनातन धर्म की छत्र-छाया मे ही इस हिन्दू राष्ट्र का प्रत्येक चाल ढाल और प्रत्येक व्यापार विकसित हुआ है | इस सनातन धर्म के मार्गदर्शन मे ही हिन्दू राष्ट्र का विकास सुनिश्चित है |
जब कभी यह राष्ट्र अपने सनातन धर्म से दूर हटेगा , तब इसका अधःपतन होगा और यदि किसी समय सनातन धर्म का विनास संभव हो तो समझ लीजिए कि उसके साथ साथ इस राष्ट्र का भी विनाश भी अटल है | सनातन हिन्दू धर्म ही भारत की राष्ट्रीयता है |
जो सत्य साधना तथा तत्वज्ञान का प्रचार परमेश्वर के पूर्वोक्त परमेश्वर के अवतार सन्त किया करते थे। जिससे आपसी प्रेम था, एक दूसरे के दुःख में दुःखी होते थे, असहाय व्यक्ति की मदद करते थे, वही शास्त्रविधि अनुसार साधना तथा वही आध्यात्मिक यथार्थ ज्ञान संत और रामपाल दास जी महाराज को भगवान कबीर साहेब जी ने प्रदान किया है।
सन्त रामपाल दास जी महाराज भी परमेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म) के उन अवतारों में से एक हैं। जो आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा अधर्म का नाश करते हैं। अब विश्व में शांति होगी। सर्व धर्म तथा पंथों के व्यक्ति एक होकर आपस में प्रेम से रहा करेंगे। राजनेता भी निर्भिमानी, न्यायकारी और परमात्मा से डर कर कार्य करने वाले होंगे। जनता के सेवक बनकर निष्पक्ष कार्य किया करेंगे। धरती पर पुनः सत्ययुग जैसी स्थिति होगी।
वर्तमान में धरती पर वह अवतार सन्त रामपाल दास जी हैं। अब घर घर में परमेश्वर के ज्ञान की चर्चा होगी। जहां गांव व शहरों में और पार्कों में बैठकर ताश खेलते हैं। कोई राजनीतिक की बातें करता है, कोई अपने पुत्रों और पुत्र वधुओं की अच्छी या निकम्में होने की चर्चा करते है वहां परमेश्वर की महिमा की चर्चा होगी तथा "ज्ञान गंगा" पुस्तक में लिखे ज्ञान पर विचार हुआ करेगा। परमात्मा की महिमा करने मात्र से भी जीव पुण्य का भागी बनता है फिर शास्त्रविधि अनुसार साधना करके जीवन सुखी बनाएंगे तथा आत्म कल्याण करायेंगे। धरती पर कलयुग में सत्ययुग जैसा समय आयेगा।
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