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गोवर्धन पूजा की सच्चाई

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गोवर्धन की कथा जानिए   इंद्र का गर्व चूर करने के लिए श्री गोवर्धन पूजा का आयोजन श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों से करवाया था। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट पूजन किया जाता  है। ब्रज में इस त्योहार का विशेष महत्व है। इसकी शुरुआत द्वापर युग से मानी जाती है  ंकवदंती है कि उस समय लोग इंद्र देवता की पूजा करते थे। अनेकों प्रकार के भोजन बनाकर तरह-तरह के पकवान व मिठाइयों का भोग लगाते थे। यह आयोजन एक प्रकार का सामूहिक भोज का आयोजन है। उस दिन अनेकों प्रकार के व्यंजन साबुत मूंग, कढ़ी चावल, बाजरा तथा अनेकों प्रकार की सब्जियां एक जगह मिलकर बनाई जाती थीं। इसे अन्नकूट कहा जाता था। मंदिरों में इसी अन्नकूट को सभी नगरवासी इकट्ठा कर उसे प्रसाद के रूप में वितरित करते थे।   यह आयोजन इसलिए किया जाता था कि शरद ऋतु के आगमन पर मेघ देवता देवराज इंद्र को पूजन कर प्रसन्न किया जाता कि वह ब्रज में वर्षा करवाएं जिससे अन्न पैदा हो तथा ब्रजवासियों का भरण-पोषण हो सके। एक बार श्रीकृष्ण ग्वालबालों के साथ गायें चराते हुए गोवर्धन पर्वत के पास पहुंचे वह देखकर हैरान हो गए कि सैकड़ों गोपियां छप्पन प्रक...

कावड़ यात्रा की सच्चाई

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सावन के महीने में सड़कों पर कांवड़ियों का तांता लगा हुआ होता है। ये कांवड़ियों पूरी तरह से शिव जी की भक्ति में डूबे हुए नजर आते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि सावन में कांवड उठाने के क्या फायदे हैं? यदि नहीं तो हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। माना जाता है कि कांवड़ यात्रा से कष्टों से मुक्ति मिलती है। कांवड़ उठाने को शिव जी की भक्ति का ही एक रूप माना जाता है। मान्यता है कि इससे शिव जी बहुत ही प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त के कष्टों को दूर करते हैं। सावन माह में कांवड़ उठाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने को बहुत ही शुभ माना गया है। कहते हैं कि ऐसे शिवभक्तों पर भोले बाबा की विशेष कृपा बरसती है। आइये जानते है क्या है सच्चाई कावड़ लाना शास्त्र विरुद्ध हे   सावन के महीने में कांवड़ यात्रा होती है। कांवड़ यात्रा करने का किसी भी शास्त्र में प्रभु का निर्देश नहीं है। कांवड़ यात्री सैकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चलकर गंगा जल लाते हैं। उनके पैरों तले करोड़ों सूक्ष्म जीव मरते हैं। यह काल का एक सुनिय...

ऐसे होगा स्वछ भारत का निर्माण

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संत रामपाल जी महाराज के प्रवचन कठोर हृदय को मुलायम बना देते हैं। श्रोताओं को विवश होकर अपने कर्मों पर विवेचन करना पड़ता है।  🔸बलात्कार जैसे घिनौने अपराध पर अंकुश सत्य अध्यात्म ज्ञान से लग सकता है। 🔸संत रामपाल जी महाराज के अतिरिक्त किसी भी गुरू का ज्ञान तथा भक्ति मंत्र शास्त्रों के अनुसार नहीं है। जिस कारण से श्रोताओं पर स्थाई प्रभाव नहीं पड़ता और अपराधों में भी अद्वितीय इजाफा हो रहा है। 🔸संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से समाज से सर्व बुराई समाप्त हो जाएंगी। 🔸सब भक्ति करके सुखी होंगे तथा मोक्ष प्राप्त करेंगे। 🔸कोई भी मानव रोग, कन्याओं के खर्चे तथा अन्य कर्ज (ऋण) के कारण हताश होकर अनमोल मानव जन्म को नष्ट नहीं करेगा। 🔸समाज सुधार, आपसी भाईचारा, प्यार तथा आत्म-उद्धार होगा। 🔸भारत फिर से सोने की चिड़िया होगा। 🔸देश में सत्ययुग का पुन्रउत्थान होगा। भारतवासी सुख का जीवन जीऐंगे। 🔸परमात्मा कबीर जी की शक्ति से आत्मा में शक्ति आती है जिससे गलत कार्य करने की प्रेरणा कभी नहीं मिलती। न कोई गलत कदम उठाने को मन करता क्योंकि परमात्मा के ज्ञान से वह घोर पाप लग...

मुक्ति पाना बहुत आसान है

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मोक्ष के बाद कोई कहीं नहीं जाता इसी धरती पर रहता है बस मोक्ष प्राप्ति के बाद हम हर पल को ध्यान से जीते हैं और वर्तमान के हर पल को ध्यानपूर्वक देखते हैं समझते हैं मुझे लगता है यही मोक्ष है अगर तुम भी हर एक पल में जीना सीख जाओ तो तुम्हें भी ऐसा लगेगा जैसे कि तुम भी मोक्ष प्राप्त कर चुके हो हमने बहुत बार देखा है कि हम दो 4 मिनट के बाद कहीं सोचने लग जाते हैं। हम लोग ज्यादातर 24 घंटे में भूतकाल के बारे में सोचते हैं या भविष्य काल के बारे में सोचते हैं अगर तुम वर्तमान काल में जीना सीख जाओ तो तुम्हें सब कुछ अच्छा लगने लगेगा और तुम खुश रहोगे और यही असलियत में मोक्ष है। मोक्ष के बाद हम स्वर्ग जाते है जोकी गलत है यदि व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होगा तो वह अक्षत धाम जाएगा अर्थात परम् धाम ईश्वर का निवास जहाँ से व्यक्ति का पुनः जन्म नही होता है क्योंकि वह ईश्वर में निवास करता है नोट:- स्वर्ग में व्यक्ति अपने विशेष अच्छे कार्यो के लिए जाता है फिर उसके अच्छे कर्म के समाप्त होने पर वह पुनः मृत्यु लोक में आता है अर्थात पृथ्वी पर ‘मोक्ष ओर स्वर्ग जाने में अंतर है’ वेदों ...

जन्माष्टमी 11 अगस्त 2020

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आगामी 11 अगस्त  को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। कोई कृष्ण को लल्ला, कान्हा, माखनचोर, सांवलिया, लड्डू गोपाल तो कोई कृष्णा कह कर प्रेम से पुकारता है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा भक्ति के रंगों में जीवंत हो जाती है। प्रत्येक त्योहार में लोकवेद की अहम भूमिका रही है। लोकवेद के अनुसार जन्माष्टमी में स्त्री-पुरुष बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। और रासलीला का आयोजन होता है। स्कन्द पुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। भविष्य पुराण का वचन है- भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। एक मान्यता के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। लेकिन कृष्ण जी खुद अपने कर्म के पाप प्रभाव को नहीं काट सके तो भक्तों के कैसे काटेंगे। (पुराणों में लिखित मत ब्रह्म...

कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है जयंती नही

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🎆कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं! सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए। पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता। 🎆कबीर साहेब का जन्म नहीं होता! आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ। गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय।  सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।। 🎆कबीर परमात्मा सशरीर सतलोक से आते हैं, उनका जन्म नहीं होता। जो देव जन्म मृत्यु के चक्कर में है उनकी जयंती मनाई जाती है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वो सत्यलोक से सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होते हैं - "गगन मंडल से उतरे सतगुरु पुरूष कबीर” जलज माहि पौडन किए, सब पीरन के‌ पीर।।* 🎆कबीर परमात्मा का प्रकट दिवस होता, जयंती नहीं! पूर्ण परमात्मा कबीर जी का का जन्म कभी मां के गर्भ से नहीं होता।  ...