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Showing posts from February, 2019

संतो की शिक्षा

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संतो की शिक्षा www.jagatgururampalji.org कबीर के जन्म के संबंध में विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं । कुछ विद्वानों ने इनको एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से उत्पन्न होना प्रमाणित किया है और कुछ ने एक मुसलमान जुलाहे के यहाँ । कुछ भी हो, किंतु कबीर ने तत्कालीन परिस्थिति के अनुसार ही स्वयं अपने व्यक्तित्व का निर्माण किया । वह एक साथ ही द्रष्टा, स्रष्टा और युग-प्रवर्तक बने । स्वभाव से ही फक्कड़, मस्तमौला और अपने प्रति ईमानदार । विद्यालयी शिक्षा से वंचित ‘मसि कागद छुयौ नहीं कलम गह्रौ नहिं हाथ ।’ कबीरदास का व्यक्तित्व भक्ति, प्रेम तथा मानवता की विभिन्न धाराओं में बहा, जिसने उनकी जीवनप्रद वाणी को साहित्य की अतुल संपत्ति बना दिया । हिंदी साहित्य के हजार वर्षों के बीच कबीर जैसा व्यक्तित्व पैदा नहीं हुआ । कबीर संप्रदाय का सबसे बड़ा सिद्धांत ईश्वर अद्वैतता है । कबीर का ईश्वर सर्वव्यापी है । वह भौतिक पदार्थों का सेवन करनेवाले ईश्वर से सर्वथा भिन्न है । पत्थर की मूर्ति के रूप में उसकी उपासना करना कबीर के विचारों के विरुद्ध है । कबीर ने अपने राम को राम, हरि, गोपाल, साहब, र...

Kabir is god

संतो की शिक्षा

God is one

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 संतो की शिक्षा एक गाँव का व्यक्ति पहली बार श्री नानक देव जी के पास गया। उसने देखा कि संत जी मायूस अवस्था में एकांत में बैठे थे।(स्मरण कर रहे थे) उस आदमी ने सतनाम-वाहेगुरू बोला। श्री नानक जी ने भी उत्तर दिया। भोजन करवाया। ज्ञान विचार सुनाए। वह व्यक्ति चला गया। एक दिन फिर वही व्यक्ति आया और बोला महाराज जी! आप कभी खुश दिखाई नहीं देते। क्या कारण है? संत नानक जी ने कहा कि:- ना जाने काल की कर डारे, किस विधि ढ़ल जा पासा वे। जिन्हाते सिर ते मौत खुड़कदी, उन्हानूं केहड़ा हांसा वे।। भावार्थ:- संत नानक जी ने कहा कि हे भाई! इस मृत्युलोक में सब नाशवान हैं। पता नहीं किसकी जाने की बारी कब आ जाए? इसलिए जिनके सिर पर मौत गर्ज रही हो, उस व्यक्ति को नाचना-गाना, हँसी-मजाक कैसे अच्छा लगेगा? मूर्ख या नशे वाला व्यक्ति इस गंदे लोक में खुशी मनाता है। जैसे एक व्यक्ति की पत्नी को विवाह के दस वर्ष पश्चात् पुत्रा हुआ। उसके उत्पन्न होने की खुशी में लड्डू बनाए, बैंड-बाजे बजाए, उधमस उतार दिया। अगले वर्ष जन्म दिन को ही मृत्यु हो गई। कहाँ तो जन्मदिन की खुशी की तैयारी थी, कहाँ रोआ-पीटी शुरू हो गई। घर नरक बन गया। ...

Kabir is god

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संतो की शिक्षा www.jagatgururampalji.org एक सेठ एक दिन एक संत के आश्रम में गया। संत की कृपा से उसको अच्छा लाभ हो गया। वह सेठ सेब-संतरों, केलों का बड़ा थैला भरकर गया। संत जी tvने एक टोकरे में डाल दिए जिसमें फल प्रसाद रखते थे। सेठ दो दिन बाद गया तो टोकरा फलों से भरा था। कुछ प्रसाद संत ने भक्तों को बाँट दिया। कुछ भक्त फल प्रसाद लाए, वह टोकरे में डाल दिया। सेठ ने संत से कहा कि महाराज! आप फल क्यों नहीं खाते? संत जी बोले कि मेरे को मौत दिखाई देती है। इसलिए खाया नहीं जाता। सेठ ने पूछा, महाराज! कब जा रहे हो संसार से? संत जी बोले, आज से चालीस वर्ष पश्चात् मेरी मृत्यु होगी। सेठ बोले, हे महाराज! यूं तो सबने मरना है, फिर क्यों डरना? यह भी कोई बात हुई। इस तरह तो आम आदमी भी नहीं डरता। आप क्या बात कर रहे हो? सेठ जी दूसरे-तीसरे दिन आए और इसी तरह की बात करे। उस नगरी का राजा भी उस संत जी का भक्त था। संत जी ने राजा से कहा कि आपकी नगरी में किरोड़ीमल सेठ है। चंदन की लकड़ी की दुकान है। उसको फाँसी की सजा सुना दो और एक महीने बाद चांदनी चैदस को फाँसी का दिन रख दो। जेल में सेठ की कोठरी (कक्ष) में फलों की टोकरी ...